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इंडिया इनफ्रास्ट्रक्चर फ़ाइनेंस कंपनी लिमिटेड (आईआईएफसीएल)

आईआईएफसीएल भारत सरकार की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है, जिसकी स्थापना वर्ष 2006 में व्यवहार्य अवसंरचना(इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर) परियोजनाओं को दीर्घकालिक वित्तीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। दीर्घकालिक ऋण प्रदान करने वाली संस्था के रूप में, आईआईएफसीएल पात्र अवसंरचना उप-क्षेत्रों तथा वित्तीय सेवाओं की विविधता के आधार पर सार्वजनिक क्षेत्र के सर्वाधिक विविधीकृत अवसंरचना(इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर वित्तदाताओं में से एक है। यह प्रत्यक्ष ऋण, अधीनस्थ ऋण, टेकआउट-फाइनेंस, अवसंरचना परियोजना बंध-पत्र तथा इनविट्स के माध्यम से निर्माणाधीन और परिचालित दोनों प्रकार की परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। यह सहायता भारत सरकार द्वारा अधिसूचित अवसंरचना उप-क्षेत्रों की समन्वित प्रधान सूची में सम्मिलित सभी अवसंरचना उप-क्षेत्रों के लिए उपलब्ध है। इन उप-क्षेत्रों में मुख्य रूप से परिवहन, ऊर्जा, जल, स्वच्छता, संचार, सामाजिक अवसंरचना तथा वाणिज्यिक अवसंरचना सम्मिलित हैं।

 

31 मार्च, 2026 के अनुसार, कंपनी की प्रदत्‍त पूंजी ₹10,000 करोड़ तथा चुकता पूंजी ₹9,999.92 करोड़ थी। सितंबर 2013 से भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा आईआईएफसीएल का पंजीकरण एनबीएफसी-एनडी-आईएफसी वित्त कंपनी के रूप में किया गया है तथा यह भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित सभी लागू विवेकपूर्ण मानदंडो का अनुपालन करती है।

 

31 मार्च 2026 तक, आईआईएफसीएल ने अपने स्वतंत्र आधार पर प्रत्यक्ष ऋण, टेकआउट- फाइनेंस, पुनर्वित्त, ऋण संवर्धन, इनविट्स तथा बंध-पत्रों के माध्यम से 890 से अधिक परियोजनाओं के लिए लगभग ₹3,64,491 करोड़ की संचयी सकल स्वीकृतियाँ प्रदान की हैं। 31 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार, इन योजनाओं के अंतर्गत संचयी संवितरण राशि ₹1,89,476 करोड़ रही।

 

आईआईएफसीएल ने एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी), वर्ल्ड बैंक, केएफ़डबल्यू, यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक (ईआईबी), जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) जैसी बहुपक्षीय एवं द्विपक्षीय वित्तीय संस्थाओं के साथ सुदृढ़ संबंध स्थापित किए हैं। 31 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार, कंपनी के पास क्रमशः 1,247 मिलियन अमेरिकी डॉलर, 109 मिलियन अमेरिकी डॉलर, 13 मिलियन यूरो, 127 मिलियन यूरो तथा 34,439 मिलियन जापानी येन की ऋण-साख उपलब्ध थीं। वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान कंपनी ने एसएमबीसी से 26,000 मिलियन जापानी येन का अपना प्रथम बाह्य वाणिज्यिक ऋण भी प्राप्त किया।

 

इन संस्थाओं के साथ स्थापित संबंधों से आईआईएफसीएल को दीर्घकालिक वित्तीय संसाधन जुटाने में सहायता मिली है। इसके परिणामस्वरूप कंपनी नवीन वित्तीय उत्पाद विकसित करने के साथ-साथ श्रेष्ठ कार्य-पद्धतियों को भी अपनाने में सक्षम हुई है, विशेषकर वे जो पर्यावरण एवं सामाजिक संरक्षण रूपरेखा तथा प्रापण प्रक्रियाओं से संबंधित है।

 

 







दिल्‍ली बैंक नगर राजभाषा कार्यान्‍वयन समिति दिल्‍ली बैंक नगर राजभाषा कार्यान्‍वयन समिति

भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग के तत्‍वावधान में दिल्‍ली बैंक नगर राजभाषा कार्यान्‍वयन समिति का गठन किया गया है । समिति के संयोजन का दायित्‍व पंजाब नैशनल बैंक के पास है । समिति की उदघाटन बैठक दिनांक 28 सितम्‍बर, 1994 को आयोजित की गई जिसका उदघाटन भारत सरकार, गृह मंत्रालय में केंद्रीय उप गृह मंत्री, माननीय श्री राम लाल राही ने किया ।


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